बुधवार, 16 सितंबर 2009

ऊधो को गोपियों का उलाहना...........................


भजन सूरदास का, स्वर पुरुषोत्तम दास जलोटा का और राग है-वृन्दावनी सारंग।

मंगलवार, 15 सितंबर 2009

मैली चादर...........


मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊँ
हे पावन परमेश्वर मेरे मन ही मन शरमाऊँ
तुमने मुझको जग में भेजा निर्मल देके काया
आकर के संसार मैं मैंने इसको दाग लगाया
जनम जनम की मैली चादर कैसे दाग छुडाऊँ
निर्मल वाणी पाकर तुझसे नाम ना तेरा गाया
नयन मूंदकर हे परमेश्वर कभी ना तुझको ध्याया
मन वीणा की तारें टूटी अब क्या गीत सुनाऊँ
इन पैरों से चलकर तेरे मंदिर कभी न आया
जहाँ जहाँ हो पूजा तेरी कभी न शीश झुकाया
हे हरिहर मैं हार के आया अब क्या हार चढाऊँसा
हरि ओम शरण के स्वर में :
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अनूप जलोटा के स्वर में:

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रविवार, 13 सितंबर 2009

नन्द-नंदनम

करो मन नन्द नंदन को ध्यान।
यह अवसर तोहे फिर ना मिलेगो, मेरो कहो अब मान॥
घूँगर वाली अलकें उसपर, कुंडल झलकत कान।
नारायण अलसाने नयना, झूमत रूप निधान॥






सोमवार, 7 सितंबर 2009

गोविन्द दामोदर माधवेति

ना मैं वैकुण्ठ में रहता हूँ और ना मैं योगियों के हृदय में बसता हूँ। हे नारद! जहाँ मेरे भक्त मेरा कीर्तन करते हैं, मैं वहीं रहता हूँ।

कौन सी ने कर दियो री टोना............




शुक्रवार, 4 सितंबर 2009

मैं नहि माखन खायौ


प्रबल प्रेम के पाले पड़कर, प्रभु को नियम बदलते देखा,
अपना मान रहे ना रहे, पर भक्त का मान ना टलते देखा,
जिसकी केवल कृपा दृष्टि पर, सकल विश्व को पलते देखा,
उनको गोकुल के गौरस पर, सौ सौ बार मचलते देखा।