मंगलवार, 15 सितंबर 2009

मैली चादर...........


मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊँ
हे पावन परमेश्वर मेरे मन ही मन शरमाऊँ
तुमने मुझको जग में भेजा निर्मल देके काया
आकर के संसार मैं मैंने इसको दाग लगाया
जनम जनम की मैली चादर कैसे दाग छुडाऊँ
निर्मल वाणी पाकर तुझसे नाम ना तेरा गाया
नयन मूंदकर हे परमेश्वर कभी ना तुझको ध्याया
मन वीणा की तारें टूटी अब क्या गीत सुनाऊँ
इन पैरों से चलकर तेरे मंदिर कभी न आया
जहाँ जहाँ हो पूजा तेरी कभी न शीश झुकाया
हे हरिहर मैं हार के आया अब क्या हार चढाऊँसा
हरि ओम शरण के स्वर में :
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अनूप जलोटा के स्वर में:

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5 टिप्‍पणियां:

  1. Hari om sharan ? ,but very different from the popular version . i request u to deliver mainstream hit versions of such well known bhajans because they revive many old memories associated with that environment when these were played on loudspeakers of street mandirs and radio.

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  2. यह भजन बहुत पसंद है इसको सुनवाने का शुक्रिया

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  3. Yes munish, Hari Om sharan! original. Listen again. Now i Have added this bhajan in Anup Jalota's voice also.

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